काशी के पर्यटन में रिकॉर्ड इजाफा, यूपी का लौटा सांस्कृतिक वैभव, साल 2025 में पहुंचे करोड़ों श्रद्धालु

By  Atul Verma January 2nd 2026 08:50 PM

वाराणसी, 2 जनवरी। वाराणसी ना केवल आध्यात्मिक नगरी के रूप में पुनर्स्थापित हुआ है, बल्कि वैश्विक पर्यटन के केंद्र के रूप में स्थापित हो गया है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के साथ गंगा घाटों, प्राचीन मंदिरों, सड़कों और चौराहों का जिस तरह से सौंदर्यीकरण और पर्यटन सुविधाओं का व्यापक विकास हुआ है, उसका प्रमाण साल 2025 में रिकॉर्ड 7 करोड़ 26 लाख से अधिक पर्यटकों ने काशी विश्वनाथ के दर्शन के आंकड़े हैं। इसमें महाकुंभ के पलट प्रवाह और महाशिवरात्रि के अवसर पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सर्वाधिक रही। वहीं, नए साल का जश्न मनाने भी लाखों की संख्या में युवा काशी पहुंचे।  

काशी में साल 2025 में पहुंचे रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक

वाराणसी में भव्य काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण और गंगा जी के घाटों और मंदिरों के जीर्णोद्धार के बाद काशी आने वाले पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। पर्यटन विभाग के अनुसार पिछले साल 2025 में काशी में करीब 7 करोड़ 2 लाख 76 हजार 780 पर्यटकों ने काशी के मनोरम घाटों और मंदिरों का दर्शन किया। इस आंकड़े में प्रयागराज महाकुंभ के 'पलट प्रवाह' के दौरान आए 2 करोड़ 87 लाख श्रद्धालुओं की संख्या भी शामिल है। जिन्होंने महाकुंभ में त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान के बाद काशी विश्वनाथ के भी दर्शन किए। साथ ही महाशिवरात्रि पर्व और पवित्र सावन माह में काशी विश्वनाथ का दर्शन पूजन करने वालों की संख्या सर्वाधिक रही, जिसके लिए मंदिर प्रबंधन कमेटी और काशी प्रशासन ने विशेष इंतजाम किये थे। 

नए साल का जश्न मनाने 30 लाख से ज्यादा युवा पहुंचे काशी

सांस्कृतिक पुनर्जागरण की लहर ने विशेष रूप से युवा पीढ़ी में धार्मिक स्थलों और तीर्थों के प्रति श्रद्धा में भी बढ़ोतरी की है। इसका जीवंत प्रमाण हमें नये साल के जश्न के अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाटों पर उमड़ी अपार भीड़ के रूप में देखने को मिला। जहां 24 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 के दौरान 30 लाख 75 हजार 769 श्रद्धालुओं ने काशी विश्वनाथ के दर्शन किए। इस संबंध में काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने विश्व भूषण मिश्र ने कहा कि सनातन संस्कृति उत्सव, उत्साह एवं उल्लास की आश्रयस्थली है। विश्व के समस्त उत्सव सनातन मान्यता में उत्कर्ष प्राप्त करते हैं। 

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