Friday 4th of April 2025

Waqf Amendment Bill: वक्फ संपत्तियां-यूपी की दास्तां! जानिए A To Z!

Reported by: GYANENDRA KUMAR SHUKLA  |  Edited by: Md Saif  |  April 03rd 2025 01:29 PM  |  Updated: April 03rd 2025 02:23 PM

Waqf Amendment Bill: वक्फ संपत्तियां-यूपी की दास्तां! जानिए A To Z!

ब्यूरो: Waqf Amendment Bill Passed Loksabha: माना जाता है कि इस दौर में देश भर में इंडियन आर्मी और रेल महकमे के बाद सर्वाधिक अचल संपत्ति वक्फ बोर्ड के पास है। वक्फ संपत्तियों के मामले में यूपी सबसे अव्वल पायदान पर है। यूपी में जिन संपत्तियों को वक्फ की जमीन पर बने होने का दावा किया जाता रहा है उसमें राज्यपाल का आधिकारिक निवास व दफ्तर राजभवन भी शामिल है। मथुरा की शाही ईदगाह, वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद, लखनऊ की ऐशबाग ईदगाह भी वक्फ की संपत्ति है। यूपी में 14 हजार हेक्टेयर जमीन वक्फ की होने के दावे किए जाते हैं। इनमें से सत्तर फीसदी यानी 11,700 हेक्टेयर जमीन सरकारी है। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट भी वक्फ की 60 संपत्तियों को सरकारी बता चुकी है। देश के इस सबसे बड़े सूबे में वक्फ से जुड़े पहलू को सिलसिलेवार समझते हैं।

भारत में वक्फ की नींव मध्यकाल में सल्तनतकाल से ही पड़ गई थी

मध्यकाल मे जब सल्तनत काल था तब सुल्तान मुइज़ुद्दीन सैम ग़ौर ने मुल्तान की जामा मस्जिद के लिए दो गांव समर्पित करते हुए इसका प्रशासन शेखुल इस्लाम के जिम्मे कर दिया था। इसके बाद मुगल काल में भारत में वक्फ संपत्तियों की संख्या में इजाफा होता चला गया। ब्रिटिश हुकूमत के दौर में वक्फ से जुड़ा विवाद लंदन की प्रिवी काउंसिल तक पहुंचा। सुनवाई के दौरान चार अंग्रेज जजों ने वक्फ को सबसे खराब और घातक व्यवस्था करार देते हुए वक्फ को अमान्य घोषित कर दिया। हालांकि, चारों जजों के सर्वसम्मति के फैसले को भारत में लागू नहीं किया गया। साल 1913 के मुसलमान वक्फ वैधीकरण अधिनियम ने भारत में वक्फ संस्था के अस्तित्व को न सिर्फ बचा लिया बल्कि लगातार फलने-फूलने का अवसर दे दिया। जबकि इस्लामिक देशों मे वक्फ संपत्तियों का कोई चलन नहीं है। मसलन, तुर्की, लीबिया, मिस्र, सूडान, लेबनान, सीरिया, जॉर्डन, ट्यूनीशिया और इराक में कोई वक्फ नहीं है।

 

वक्फ के शाब्दिक अर्थ और इसके मकसद को समझते हैं 

 वक्फ अरबी भाषा के वकूफा से बना हुआ है। जिसका शाब्दिक अर्थ होता है खुदा या अल्लाह के नाम समर्पित की गई संपत्ति। अगर किसी मुस्लिम शख्स की संतान नहीं होती है तो उसकी मृत्यु होने पर उसकी संपत्ति वक्फ के हवाले कर दी जाती है। वहीं कुछ लोग जीवित रहते हुए भी स्वेच्छा से अपनी संपत्ति वक्फ बोर्ड को दान कर देते हैं। वक्फ की गई संपत्ति पर उसका परिवार या कोई दूसरा शख्स दावा नहीं कर सकता है। शेयर से लेकर घर, मकान, खेत, किताब से लेकर नगदी तक वक्फ किया जा सकता है। ऐसी संपत्तियों पर मस्जिद, मदरसे, कब्रिस्तान, ईदगाह और मजार बनाए जा सकते हैं। वक्फ संपत्तियों पर स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, डिस्पेंसरी और मुसाफिरखानों को बनाने का प्रावधान भी है। देश भर में बने सभी कब्रिस्तानों की देखरेख वक्फ बोर्ड ही करते हैं।

  

वक्फ संपत्तियों की देखरेख करने के लिए केंद्र व राज्य स्तर पर बोर्ड मौजूद हैं

वक्फ की संपत्ति की देखभाल के लिए स्थानीय व राज्य स्तर पर वक्फ बोर्ड गठित किए गए हैं। केंद्रीय स्तर पर सेंट्रल वक्फ काउंसिल वक्फ संपत्तियों को सीधे नियंत्रित तो नहीं करती है पर राज्यों के वक्फ बोर्डों को जरूरी दिशा-निर्देश देती है, इनमें तालमेल स्थापित करती है। वक्फ एक्ट 1995 के तहत देश भर में तीस वक्फ बोर्ड हैं। यूपी और बिहार में शिया व सुन्नी वक्फ बोर्ड अलग-अलग हैं। ये वक्फ बोर्ड संपत्तियों की देखरेख-रखरखाव, व उससे होने वाले आय-व्यय का ब्यौरा रखते हैं। इन वक्फ बोर्डों के सदस्यों पर गौर करें तो वक्फ बोर्ड में कमिश्नर संपत्तियों का लेखा-जोखा रखते हैं। बोर्ड में मुस्लिम विधायक, मुस्लिम सांसद, मुस्लिम आईएएस अधिकारी, मुस्लिम टाउन प्लानर, मुस्लिम अधिवक्ता और मुस्लिम बुद्धिजीवी शामिल होते हैं। वक्फ ट्रिब्यूनल यानी विशेष न्यायिक निकाय, जो वक्फ संपत्तियों से संबंधित विवादों को संभालते हैं। वक्फ ट्रिब्यूनल में एडमिनिस्ट्रेटिव अफसर होते हैं जिनकी नियुक्ति संबंधित राज्य सरकारें करती हैं।

  

आजादी के बाद बने कानूनों व संशोधनों ने वक्फ बोर्डों को असीमित अधिकार दे दिए

भारत में वक्फ बोर्ड सबसे बड़े भू स्वामियों में है। उसके हितों की रक्षा करने वाले कानून भी हैं। आजादी के बाद देश में 1954 में वक्फ अधिनियम लाया गया। जिसके जरिए पुराने कानून को एक नए वक्फ अधिनियम से बदला गया, जिसने वक्फ बोर्डों को और ज्यादा शक्ति दी। शक्ति में इस इजाफे के साथ अतिक्रमण और वक्फ संपत्तियों के अवैध पट्टे और बिक्री की शिकायतों भी बढ़ गईं। साल 2013 में, अधिनियम में संशोधन किया गया, जिससे वक्फ बोर्डों को मुस्लिम दान के नाम पर संपत्तियों का दावा करने के लिए असीमित अधिकार प्रदान किए गए। संशोधनों ने वक्फ संपत्तियों की बिक्री को असंभव बना दिया।

  

यूपी में वक्फ की सर्वाधिक संपत्तियां सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास हैं

उत्तर प्रदेश में शिया वक्फ बोर्ड के पास 15 हजार 386 संपत्तियां ही हैं, जबकि सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास 2 लाख 10 हजार 239 से भी अधिक संपत्तियां हैं। संभल, रामपुर, मुरादाबाद और अमरोहा जिले की कई संपत्तियां वक्फ संपत्ति की फेहरिस्त में शामिल हैं। इमामबाड़ा काशबाग रामपुर, फैजाबाद में बहू बेगम का मकबरा, लखनऊ का बड़ा इमामबाड़ा और छोटा इमामबाड़ा, रामपुर में इमामबाड़ा किला -ए-मुअल्ला, बिजनौर में दरगाहे आलिया नजफ़-ए-हिन्द, आगरा में मजार शहीद-ए-सालिस भी शिया बोर्ड की संपत्ति है. वहीं,  टीले वाली मस्जिद लखनऊ, शाही अटाला मस्जिद जौनपुर, दरगाह सैयद सालार मसूद गाजी बहराइच, सलीम चिस्ती का मकबरा फतेहपुर सीकरी, धरहरा मस्जिद वाराणसी, जामा मस्जिद लखनऊ और नादान महल मकबरा लखनऊ सरीखी ऐतिहासिक संपत्तियों पर  सुन्नी वक्फ बोर्ड के दावे हैं।

  

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हुई जांच में वक्फ संपत्तियों से जुड़ी विसंगतियां उजागर हुईं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिसंबर 2023 में राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि कि कितनी सरकारी संपत्तियां गलत ढंग से वक्फ संपत्ति के नाम पर दर्ज की गई हैं उसकी जांच करके ब्यौरा दिया जाए। जब जांच हुई तो उजागर हुआ कि वक्फ बोर्ड जितनी संपत्तियां होने का दावा कर रहा है, उनमें से महज 2-2.5 फीसदी का ही तहसील से वक्फ के पक्ष में नामांतरण कराया गया है। यानी, राजस्व रिकॉर्ड में ये संपत्तियां वक्फ के बजाय किसी अन्य नाम से दर्ज हैं। जबकि नियम है कि वक्फ एक्ट की धारा-37 के तहत जब बोर्ड किसी संपत्ति को वक्फ के रूप में दर्ज करके नोटिफिकेशन जारी करता है, तो उसकी एक प्रति संबंधित तहसील को भेजनी होती है। ताकि, तहसील प्रशासन उस संपत्ति का वक्फ के पक्ष में नामांतरण कर सके या असहमत होने पर कारण सहित वापस कर दे। यह प्रक्रिया नोटिफिकेशन जारी होने के छह माह के भीतर पूरी करना अनिवार्य है। दरअसल, वक्फ बोर्डों ने वक्फ संपत्तियों नामांतरण के लिए नोटिफिकेशन तहसीलों को भेजे ही नहीं। जिससे राजस्व रिकॉर्ड में पहले वाला नाम ही चला आ रहा है। 

            इन मामलों मेें कोताही बरतने वाले अफसरों व सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने व विसंगतियों के समाधान के लिए योगी सरकार ने कवायद तो शुरू कर दी। पर वक्फ कानून की जटिलताओं के चलते मुकम्मल कार्रवाई नहीं हो पा रही थी अब नए संशोधन कानून के बाद उम्मीद है कि यूपी में वक्फ संपत्तियों से संबंधित विवादों का माकूल हल हो सकेगा और वक्फ प्रबंधन को नई दिशा हासिल हो सकेगी।    

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