Saturday 14th of February 2026

डीएम ने प्रोजेक्ट ‘नंदा–सुनंदा’ से 34 बेटियों की रुकी पढ़ाई को दी नई उड़ान, पुनर्जीवित की शिक्षा

Reported by: Tripurari Mishra  |  Edited by: Atul Verma  |  February 14th 2026 04:25 PM  |  Updated: February 14th 2026 04:25 PM

डीएम ने प्रोजेक्ट ‘नंदा–सुनंदा’ से 34 बेटियों की रुकी पढ़ाई को दी नई उड़ान, पुनर्जीवित की शिक्षा

देहरादून, उत्तराखंड, 14 फरवरी। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में चल रहे प्रोजेक्ट का 13वां संस्करण सम्पन्न हो गया है और अब तक 62 लाख रुपये की राशि से 126 जरूरतमंद बालिकाओं को शैक्षिक संजीवनी मिली है, देहरादून के कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित प्रोजेक्ट ‘नंदा–सुनंदा’ के 13वें संस्करण में जिला प्रशासन ने 34 जरूरतमंद बालिकाओं की बाधित शिक्षा को पुनर्जीवित करते हुए उन्हें 9 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की।

'बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है लक्ष्य'

जिलाधिकारी सविन बसंल ने बालिकाओं को चेक वितरित करते हुए कहा कि बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना ही ‘नंदा–सुनंदा देवियों’ की सच्ची वंदना है। जिलाधिकारी ने कहा कि हमने नंदा–सुनंदा देवियों को प्रत्यक्ष नहीं देखा, लेकिन ये सभी बेटियां उसी स्वरूप की प्रतीक हैं। उनकी शिक्षा, आत्मबल और भविष्य को सशक्त करना ही समाज की वास्तविक पूजा है। उन्होंने बालिकाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपनी शिक्षा के प्रति जुनून बनाए रखें, महापुरुषों की जीवनियां पढ़ें और सफलता प्राप्त कर अन्य बालिकाओं के लिए रोल मॉडल बनें।62 लाख से 126 बालिकाओं को मिला लाभ

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में संचालित है योजना

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में संचालित इस योजना के तहत अब तक लगभग 62 लाख रुपये की सहायता से 126 बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित किया जा चुका है। आर्थिक तंगी, पिता के निधन, गंभीर बीमारी अथवा अन्य पारिवारिक परिस्थितियों के कारण पढ़ाई छोड़ने की कगार पर पहुंची बेटियों को इस योजना ने नई आशा दी है।15-15 दिन स्कूल से बाहर खड़ी रहीं बेटियां। कार्यक्रम के दौरान कुछ अभिभावकों ने अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने बताया कि फीस जमा ना होने के कारण स्कूलों में बच्चियों को 15-15 दिन तक बाहर खड़ा रखा गया, यहां तक कि परीक्षा से वंचित रखने की चेतावनी भी दी गई। ऐसे में जिला प्रशासन की पहल ने इन परिवारों को बड़ी राहत दी।

इन बेटियों की फिर से जली उम्मीद की लौ

कैंसर पीड़ित पिता की बेटी सृष्टि की बीसीए 5वें सेमेस्टर की शिक्षा पुनर्जीवित हुई, इसके अलावा पैरालाइज्ड पिता की बेटी शिवांगी (बीएजे एंड एमसी डिजिटल, द्वितीय सेमेस्टर) की पढ़ाई फिर शुरू हुई। वहीं, पिता के निधन के बाद बाधित हुई अलाईना रावत (बीएससी नर्सिंग) की शिक्षा पुनः आरंभ हुई। साथ ही आकृति बडोनी (बी-कॉम), तनिका (कक्षा 10), लावण्या (कक्षा 9), दिव्या (कक्षा 6), नंदनी (यूकेजी), ईशिका (कक्षा 3) सहित अन्य बालिकाओं की शिक्षा को भी योजना के तहत पुनर्जीवित किया गया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की मानवी (यूकेजी) की पढ़ाई भी अब निर्बाध जारी रहेगी।

34 बालिकाओं की शिक्षा ‘नंदा–सुनंदा’ योजअभिभावकों ने जताया आभार

बालिकाओं के अभिभावकों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आर्थिक संकट के कारण बच्चों की पढ़ाई रुक रही थी, लेकिन इस योजना ने उनके भविष्य को संवारने का अवसर दिया है। इस मौके पर उप जिलाधिकारी सदर हरिगिरि, उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी, जिला कार्यक्रम अधिकारी (बाल विकास) जितेंद्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट सहित अनेक अधिकारी एवं अभिभावक मौजूद रहे।

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