Friday 2nd of January 2026

गंगा की रेत पर बस गया तंबुओं का अस्थाई शहर, कल पौष पूर्णिमा से शुरू होगा माघ मेला

Reported by: Gyanendra Shukla  |  Edited by: Atul Verma  |  January 02nd 2026 08:39 PM  |  Updated: January 02nd 2026 08:39 PM

गंगा की रेत पर बस गया तंबुओं का अस्थाई शहर, कल पौष पूर्णिमा से शुरू होगा माघ मेला

प्रयागराज, 2 जनवरी। प्रयागराज के संगम तट में लगे आस्था के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक समागम माघ मेले में पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व के साथ ही माघ मेला क्षेत्र में तप, साधना और संयम की त्रिवेणी प्रवाहित होगी। भक्ति साधना और संयम की ये त्रिधारा है कल्पवास जिसकी शुरुआत पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ कल से शुरू होगी। इस बार कल्पवासियों की संख्या में हुई बढ़ोतरी की वजह से कल्पवासियों के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। माघ मेला कल यानि 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा से शुरू होकर 15 फरवरी महाशिवरात्रि तक चलेगा।

4 लाख से ज्यादा कल्पवासियों की भक्ति से प्रकाशमान होंगे गंगा के तट

प्रयागराज के संगम तट पर होने वाला माघ मेला धर्म, अध्यात्म और संस्कृति का देश का सबसे बड़ा वार्षिक आयोजन है। पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व के साथ ही ज्ञान , भक्ति और साधना की विविध धाराएं यहां प्रवाहित होंगी। माघ मेला क्षेत्र में एक तरफ दंड धारण करने वाले दंडी संतों और  रामानंदी आचार्य संतो और मुकाम धारी खालसा के संतों की दुनिया होगी, तो वहीं होगा चतुष्पीठ  के शंकराचार्यों का वैभव। अध्यात्म के इस सागर में यहां कल्पवासियों के जप, तप और संयम की त्रिवेणी अभी से प्रवाहित होने लगी है। पौष पूर्णिमा से पूरे एक महीने तक गंगा और यमुना की रेत पर तंबुओं के शिविर बनाकर ठिठुरती ठंड में साधना करने वाले इन कल्पवासियों की संख्या में इस साल अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। मेला प्रशासन का अनुमान है कि इस बार 4 लाख कल्पवासी माघ मेले में कल्पवास करेंगे।

पहली बार कल्पवासियों के लिए बनाया गया प्रयागवाल नगर

कल्पवासियों को माघ मेले का प्रथम साधक माना जाता है जिनके बिना माघ मेले के आयोजन की कल्पना भी नहीं संभव है। माघ मेला क्षेत्र में इन्हें बसाना मेला प्रशासन की प्राथमिकता होती है। एडीएम माघ मेला दयानन्द प्रसाद बताते हैं कि इस बार महाकुंभ 2025 के भव्य और दिव्य आयोजन की स्मृति और 12 साल बाद कल्पवास के संकल्प लेने की परम्परा के चलते कल्पवासियों की संख्या बढ़ गई है। इसे देखते हुए पहली बार माघ मेला क्षेत्र में कल्पवासियों के लिए एक अलग से भी 950 बीघे में एक नगर बसाया गया है जिसे प्रयागवाल नाम दिया गया है। नागवासुकी मंदिर के सामने गंगा नदी के पार इसे बसाया गया है। तीर्थ पुरोहितों और मेला प्रशासन के साथ आपसी विचार विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया है। वैसे तीर्थ पुरोहितों की मांग और सहूलियत को देखते हुए विभिन्न सेक्टरों में भी कल्पवासियों के लिए तंबू लगाए गए हैं। कल्पवासी की उम्र और अवस्था को देखते हुए इन्हें बसाया जा रहा है।  मेला क्षेत्र में मूल रूप से कल्पवास करने वाले इन श्रद्धालुओं को गंगा के तटों के पास ही तंबुओं की व्यवस्था की गई थी ताकि सुबह प्रतिदिन इन्हें गंगा स्नान के लिए दूर तक न चलना पड़े। 

कल्पवासियों के शिविर में स्वच्छता पर रहेगी प्राथमिकता

माघ मेला क्षेत्र  को दिव्य ,भव्य और स्वच्छ स्वरूप दे रही है। इसके लिए संपूर्ण मेला क्षेत्र में स्वच्छता के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। मेला प्रशासन के मुताबिक विभिन्न सेक्टर में बस रहे कल्पवासियों के शिविर में भी स्वच्छता को प्राथमिकता दी जा रही है। कल्पवासियों से भी अपील की जाएगी कि वह सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल शिविर में ना करें। बुजुर्ग कल्पवासियों के लिए शीत लहरी से बचाव हो इसके लिए भी प्रशासन कई कदम उठा रहा है। प्रशासन ने कल्पवासियों के शिविर के बाहर अलाव जलाने की व्यवस्था की थी ताकि शीत लहरी से कल्पवासियों का बचाव हो सके।

माघ मेला 2026 के मुख्य स्नान पर्वः

पौष पूर्णिमा : कल 3 जनवरी

मकर संक्रांति :14 जनवरी

मौनी अमावस्या : 18 जनवरी

बसंत पंचमी : 23 जनवरी

माघी पूर्णिमा : 01 फरवरी

महाशिवरात्रि : 15 फरवरी

Latest News

PTC NETWORK
© 2026 PTC News Uttar Pradesh. All Rights Reserved.
Powered by PTC Network