कॉमनवेल्थ गेम्स खत्म, 24 साल में भारत का सबसे खराब प्रदर्शन, बड़ी वजह आई सामने, जानें हरियाणा के खाते में आए कितने मेडल?

By  Atul Verma August 3rd 2026 04:10 PM -- Updated: August 3rd 2026 04:17 PM

3 अगस्त, 2026 (ब्यूरो)। बीती 23 जुलाई को स्कॉटलैंड के ग्लासगो में शुरू हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन हो गया है, इस खेल महाकुंभ में सर्वाधिक मेडल्स जीतने की रेस तमाम देशों के एथलीट के बीच देखने को मिली। बात सबसे ज्यादा मेडल की करें तो ऑस्ट्रेलिया के खाते में सबसे ज्यादा मेडल आए, जिसने 70 गोल्ड के साथ कुल 170 मेडल अपनी झोली में डाले, जबकि इंग्लैंड मेडल्स का शतक लगाने में कामयाब रहा, इंग्लैंड ने 29 गोल्ड समेत कुल 110 मेडल अपने नाम किए। वहीं, दूसरी ओर भारत ने पिछले 24 साल में अपना सबसे खराब कॉमनवेल्थ प्रदर्शन किया है, हालांकि मेडल कम आने की एक खास वजह भी है।

13 गोल्ड समेत भारत ने जीते कुल 39 मेडल, ओवरऑल प्रदर्शन में पिछड़े


ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलीट्स का दबदबा देखने को नहीं मिला और भारत के खाते में कुल 39 मेडल ही आ पाए, इनमें 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज शामिल हैं। भारतीय खिलाड़ियों ने सबसे ज्यादा मेडल एथलेटिक्स में जीते, जबकि बॉक्सिंग दूसरे और वेटलिफ्टिंग तीसरे स्थान पर रहा। बॉक्सिंग में भारतीय खिलाड़ियों ने 7 गोल्ड मेडल जीतकर भारत ने इतिहास रचा, लेकिन फिर भी ये पिछले 24 साल में भारत का सबसे खराब प्रदर्शन साबित हुआ।

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आंकड़े गवाह हैं कि साल 2002 मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ गेम्स से भारत ने हर बार के कॉमनवेल्थ गेम्स में 50 या उससे ज्यादा मेडल जीतने का सिलसिला बरकरार रखा, साल 2002 के मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ गेम्स में 69 मेडल, साल 2006 मेलबर्न कॉमनवेल्थ गेम्स में 50 मेडल, साल 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में 101 मेडल, 2014 ग्लासगो कॉमनवेस्थ गेम्स में 64 मेडल, 2018 गोल्डकोस्ट कॉमनवेस्थ गेम्स में 66 मेडल और 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने 60 मेडल जीते थे, लेकिन इस बार के कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रदर्शन उम्मीद से बहुत ही कम रहा और भारतीय खिलाड़ी सिर्फ 39 मेडल ही जीत पाए।

इस बार क्यों नहीं लगा मेडल का अर्धशतक ?


दरअसल इस बार मेडलों की संख्या सिर्फ 39 होने के पीछे बहुत बड़ी वजह छिपी है. 2026 के कॉमनवेल्थ गेम्स ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में होने थे, सबकुछ ठीक चल रहा था लेकिन मेजबानी की हामी भरने के करीब 15 महीने बाद यानी 2023 में वहां की सरकार ने कहा कि खेलों के आयोजन की अनुमानित लागत 6-7 बिलियन डॉलर तक पहुंच रही है, जो बहुत ज्यादा थी. इस वजह से विक्टोरिया ने खेलों की मेजबानी से इनकार कर दिया। करीब 1 साल तक 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के पास कोई मेजबान नहीं था, लेकिन साल 2024 में आखिरकार ग्लासगो ने हाथ आगे बढ़ाया। चूंकि ग्लासगो के पास तैयारियों के लिए कम समय था और इन्फ्रास्ट्रक्चर दोबारा से तैयार करने के लिए पर्याप्त समय नहीं था। इसलिए कुश्ती, बैडमिंटन और हॉकी जैसे खेलों को हटा दिया गया, ऐसे में अधिकांश उन खेलों पर मार पड़ी, जिनमें भारत बहुत अच्छा प्रदर्शन करता आया है।

कॉमनवेल्थ गेम्स में दिखा हरियाणा के खिलाड़ियों का दम


कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हरियाणा के खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश और प्रदेश का नाम रोशन किया। हरियाणा के खिलाड़ियों ने कुल 11 मेडल अपने नाम किए, इनमें 7 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। हरियाणा के खिलाड़ियों को सबसे ज्यादा कामयाबी बॉक्सिंग में मिली, जहां खिलाड़ियों ने 6 गोल्ड और 1 सिल्वर मेडकल जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया है, क्योंकि ये पहला मौका है जब किसी कॉमनवेल्थ गेम्स में हरियाणा के खिलाड़ियों ने बॉक्सिंग में एक साथ 6 गोल्ड मेडल जीते हो।

हरियाणा के भिवानी जिले के खिलाड़ियों के नाम का बजा डंका


कॉमनवेल्थ गेम्स में हरियाणा के खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन में भिवानी के खिलाड़ियों का सबसे बड़ा योगदान रहा, क्योंकि 6 गोल्ड मेडल में से 5 गोल्ड मेडल अकेले भिवानी के खिलाड़ियों ने ही जीते, जिनमे हिसार के अंकुश पंघाल, साक्षी चौधरी, प्रीति पंवार, जैस्मिन लंबोरिया, प्रिया घनघस और सचिन सिवाच ने बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जीतकर देश की झोली में डाले। वहीं, नरेंद्र बेरवाल ने भी सिल्वर मेडल अपने नाम किया।

2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स के आंकड़ों पर एक नजर


साल 2022 के कॉमनवेल्थ खेलों को याद करें तो भारत ने अकेले कुश्ती में ही 12 मेडल जीते थे, जबकि टेबल टेनिस में 7 मेडल, बैडमिंटन में 6 मेडल जीते थे। वहीं हॉकी में भी भारत के खाते में 2 मेडल आए थे। अगर खेलों को हटाया नहीं जाता और तो भारत आसानी से 70 मेडल का आंकड़ा पार कर सकता था।

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खूबसूरत क्लोजिंग सेरेमनी के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन हो गया है। वहीं, क्लोजिंग सेरेमनी में भारतीय दल का नेतृत्व गोल्ड मेडल जीतने वाली बॉक्सर जैस्मिन लम्बोरिया के पास रहा। वहीं गेम्स खत्म होने के साथ ही कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स फ्लैग को भारतीय दिग्गज नीरज चोपड़ा को सौंपा गया, जिन्होंने इसे भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा और गुजरात के उप-मुख्यमंत्री हर्ष संघवी को सौंपा, क्योंकि कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की अगली बारी अब भारत की है।

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