चंडीगढ़, 30 सितंबरः चंडीगढ़ सेक्टर-11 के पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज की जेंडर इक्विटी एंड सेल्फ डिफेंस सोसाइटी ने इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल के सहयोग से “Say No to Dowry” (दहेज को कहें ना) विषय पर एक जागरूकता सत्र आयोजित किया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. जितेंद्र गोंड द्वारा की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को दहेज प्रथा से जुड़ी सामाजिक बुराइयों के प्रति जागरूक करना तथा लैंगिक समानता को बढ़ावा देना रहा।
सत्र के दौरान दहेज प्रथा के व्यक्ति, परिवार और समाज पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि दहेज आर्थिक दबाव, लैंगिक भेदभाव, उत्पीड़न और महिलाओं के साथ असमान व्यवहार को बढ़ावा दे सकता है। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि दहेज को विवाह का आवश्यक हिस्सा या सामाजिक परंपरा नहीं माना जाना चाहिए।
महिलाओं के अधिकारों, सम्मान और कानूनी जागरूकता के महत्व को भी रेखांकित किया गया। विद्यार्थियों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझने तथा भेदभावपूर्ण प्रथाओं के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही, ये संदेश दिया गया कि युवा पीढ़ी पुरानी सामाजिक कुरीतियों को चुनौती देने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कार्यक्रम में ये संदेश दिया गया कि विवाह आपसी सम्मान, समानता, समझ और सहमति पर आधारित होना चाहिए, न कि धन या वस्तुओं की मांग पर। विद्यार्थियों को अपने परिवारों और समुदायों में जागरूकता फैलाने तथा दहेज से संबंधित भेदभाव से मुक्त समाज के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का समापन एक सशक्त सामूहिक संदेश "दहेज कोई परंपरा नहीं है, समानता हमारा अधिकार है" के साथ हुआ। ये जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों को संवेदनशील बनाने और एक समान, सम्मानजनक एवं सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में एक सार्थक पहल रहा।