मुजफ्फरनगर, यूपी (9 अगस्त): पिछले करीब 5 महीने में 23 फांसी की सजा सुनाने वाले जज रवि कुमार दिवाकर इन दिनों सुर्खियों में बने हुए हैं, वहीं, अब वो एक और बयान देकर चर्चा में आए हैं। दरअसल, जज रवि कुमार दिवाकर ने एक और फांसी की सजा सुनाई है. उन्होंने साल 2018 के मुजफ्फरनगर के चर्चित शहजादी हत्याकांड में दोषी पति नदीम को फांसी की सजा सुनाई है. इसके साथ ही उस पर 1 लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है और इसी के साथ उन्होंने लगातार मिल रही धमकियों को लेकर एक बयान भी दिया है।
मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलाना नहीं- जज रवि कुमार
एकमामले में फैसला सुनाते समय न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की टिप्पणी भी चर्चा में रही. उन्होंने अपने फैसले में लिखा, “मैं मरना पसंद करूंगा, डरपोक जज कहलाना नहीं पसंद करूंगा.” उन्होंने आगे कहा कि जब तक मैं अपने सिद्धांतों पर चल सकता हूं, तब तक सेवा करूंगा, अन्यथा त्यागपत्र देना पसंद करूंगा. जज ने अपने फैसले में ये भी लिखा कि जब तक वो जज की कुर्सी पर हैं, तब तक फैसला लेने का अधिकार उनका ही रहेगा. उनकी इस टिप्पणी को न्यायिक दायित्व और अपने सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता के तौर पर देखा जा रहा है.
क्या है मुजफ्फरनगर का शहजादी हत्याकांड?
ये मामला बीती 23 जुलाई 2018 को शाहपुर कस्बे में दहेज की मांग को लेकर नदीम द्वारा अपनी पत्नी शहजादी (23) को कथित तौर जला देने से संबंधित है. शहजादी को गंभीर हालत में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था, जहां बाद में उसकी मौत हो गई थी. शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि मौत से पहले दर्ज कराए गए बयान में शहजादी ने आरोप लगाया था कि नदीम ने उसे जलाया था. उन्होंने बताया कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के सभी 11 गवाह मुकर गए, लेकिन अदालत ने शहजादी के मौत से पहले बयान के आधार पर नदीम को दोषी ठहराया. शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि न्यायाधीश दिवाकर की अदालत ने पिछले चार महीनों में 11 मामलों में 23 लोगों को मृत्युदंड दिया है.
10 चर्चित मामलों में 23 दोषियों को सुनाई फांसी की सजा
जज रवि कुमार दिवाकर इससे पहले भी कई चर्चित मामलों में कड़े फैसले सुना चुके हैं. मुजफ्फरनगर में तैनाती के दौरान 6 अप्रैल से अब तक 10 चर्चित मामलों में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने का दावा किया गया है. शहजादी हत्याकांड में सुनाया गया यह फैसला भी इसी कड़ी में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, फांसी की सजा के मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और अपील का प्रावधान भी होता है.