ब्यूरो: Rana Sanga Controversy: यूं तो अंग्रेजी में कहावत है 'let the past bury its dead' यानी गड़े मुर्दे उखाड़ने से बचना चाहिए लेकिन सियासत में इसकी परवाह कोई नहीं करता। एक दूसरे पर तंज कसने-घेराबंदी करने और वोटों का समीकरण दुरुस्त करने के लिए न सिर्फ इतिहास के पन्ने खोले जाते हैं बल्कि इसके जरिए विपक्षियों पर तीखे हमले किए जाते हैं। इसकी जीवंत बानगी है राणा सांगा को लेकर दिए गए बयान और उससे उपजा विवाद। सपा सांसद के संसद में दिए गए बयान से ये विवाद सुलगा फिर देखते-देखते ये मुद्दा सदन से निकलकर सड़क पर जा पहुंचा। इसे लेकर हंगामा-हिंसा भी हुई तो जुबानी वार-पलटवार के दौर भी तेज हुए।
राज्यसभा में सपा सांसद ने बयान देकर विवाद की नींव रख दी
बीते दिनों राज्यसभा में कार्यवाही के दौरान सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने राणा सांगा को लेकर जो टिप्पणी की उसने सूबे के सियासी माहौल को गरमा दिया है। सपा सांसद ने कहा था, “बीजेपी के लोगों का तकिया कलाम हो गया है कि मुसलमानों को बाबर का डीएनए कहने का. बीजेपी के लोग बात-बात पर हर जगह इस बात को दोहराते हैं. आगे कहा कि बाबर को हिंदुस्तान लाया कौन था? इब्राहिम लोदी को हराने के लिए बाबर को राणा सांगा ने बुलाया था। तो मुसलमान तो बाबर की औलाद हैं और तुम गद्दार राणा सांगा की औलाद हो. ये हिंदुस्तान में तय हो जाना चाहिए”। इस बयान को लेकर बीजेपी बिफर उठी सदन में तीखा विरोध दर्ज कराया तो वहीं क्षत्रिय समाज से जुड़े संगठन भी भड़क उठे। शुरुआती दौर में सपा मुखिया अखिलेश यादव बचाव की मुद्रा में नजर आए।
सपा सांसद के बयान को लेकर बीजेपी ने आक्रामक रुख अपनाया
बीजेपी ने सपा सांसद के इस बयान पर त्वरित गति से आक्रामक तेवर अख्तियार कर लिए। दरअसल, छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप सरीखे राष्ट्र नायकों के जरिए बीजेपी पुरातन सनातनी गौरव पुनर्स्थापित करने की मुहिम में जुटी है। ऐसे में राणा सांगा के विरूद्ध की गई सपा सांसद की टिप्पणी ने बीजेपी को आक्रमण का मौका दे दिया। बीजेपी नेताओं ने सपा पर तीखा निशाना साधा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो लोग भारत के महापुरुषों को अपमानित करते हैं. उन आक्रांताओं का महिमामंडन करते हैं, जिन्होंने भारत की सनातन संस्कृति को रौंदने का कार्य किया था, बेटियों की इज्जत पर हाथ डालने और हमारी आस्था पर प्रहार किया था, उन्हें उसे आज का यह नया भारत स्वीकार करने को कतई तैयार नहीं है। आक्रांता के महिमामंडन का मतलब देशद्रोह की नींव को पुख्ता करना है और स्वतंत्र भारत ऐसे किसी देशद्रोही को स्वीकार नहीं कर सकता है।
सांसद के आवास पर हुए हंगामे ने सपा को नया मुद्दा थमा दिया
शुरूआती दौर में रामजीलाल सुमन के बयान को लेकर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव बचाव की मुद्रा में नजर आ रहे थे लेकिन तभी आगरा में सपा सांसद रामजीलाल सुमन के आवास पर करणी सेना ने हंगामा कर दिया। पथराव व तोड़फोड़ की गई। जिसे लेकर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। आरोप-प्रत्यारोप के दौर तेज हो गए हैं। अब तक बचाव की मुद्रा अपनाकर डैमेज कंट्रोल कर रहे अखिलेश यादव ने पैंतरा बदला। उन्होंने बयान दिया कि रामजीलाल सुमन दलित है इसलिए उनके घर पर हमला किया गया। इसके बाद सपा के महासचिव रामगोपाल यादव और शिवपाल यादव ने भी बयानों के जरिए सपा के दलित कार्ड को धार देते हुए बीजेपी पर वार किए।
सपा-बीजेपी के दरमियान छिड़ी बयानों की जंग में बीएसपी ने भी एंट्री ली
बीते कुछ वक्त से कड़े तेवरों में नजर आ रही बीएसपी मुखिया मायावती ने राणा सांगा-बाबर मुद्दे को लेकर बयानों की झड़ी लगा दी। समाजवादी पार्टी को निशाने पर लेते हुए कहा कि सपा अपने राजनीतिक लाभ के लिए अपने दलित नेताओं को आगे करके घिनौनी राजनीति कर रही है, दलितों को नुकसान पहुंचाने में लगी है, यह उचित नहीं। दलितों को इनके सभी हथकंडों से सावधान रहना चाहिए। मायावती ने ये भी जोड़ा कि सपा को अपने स्वार्थ में किसी भी समुदाय का अपमान करना ठीक नहीं। इससे समाज में अमन-चैन और सौहार्द बिगड़ेगा, जो ठीक नहीं। मायावती यहीं नहीं रुकीं उन्होंने एक्स पर पोस्ट करके लिखा, "आगरा की हुई घटना के साथ-साथ सपा मुखिया अखिलेश यादव को इनकी सरकार में 2 जून 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड में इस पार्टी द्वारा मेरे ऊपर कराया गया जानलेवा हमला भी इनको जरूर याद कर लेना चाहिए तथा इसका पश्चाताप भी जरूर करना चाहिए।" ये भी कहा कि आगरा घटना की आड़ में अब सपा अपनी राजनीतिक रोटी सेंकना बंद करे और आगरा की हुई घटना की तरह यहां दलितों का उत्पीड़न और ज्यादा न कराए।
मामला दलित-क्षत्रिय विवाद का रूप लेते भड़कने लगा तो सपा मुखिया ने सफाई दी
बीजेपी के तीखे तेवरों के वार और बीएसपी मुखिया द्वारा घेर जाने के बाद अखिलेश यादव ने एक्स प्लेटफार्म पर पोस्ट लिखकर कहा कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय और समतामूलक समाज की स्थापना में विश्वास करती है। हमारा उद्देश्य किसी इतिहास पुरुष का अपमान करना नहीं हो सकता। समाजवादी पार्टी मेवाड़ के राजा राणा सांगा की वीरता और राष्ट्रभक्ति पर कोई सवाल नहीं कर रही। साथ ही कहा कि हमारे सांसद ने सिर्फ एक पक्षीय लिखे गये इतिहास और एक पक्षीय की गई व्याख्या का उदाहरण देने की कोशिश की है। हमारा कोई भी प्रयास राजपूत समाज या किसी अन्य समाज का अपमान करना नहीं है।
बयानों और विवादों से सियासी समीकरणों पर भी असर पड़ रहा है
ग़ौरतलब है कि जहां सपा के दलित कार्ड से होने वाले नुकसान से बीजेपी खेमा वाकिफ है तो वहीं, सपाई खेमा भी विवाद के ज्यादा तूल पकड़ने पर क्षत्रिय वोट बैंक में उपज रहे आक्रोश को भी समझ रहा है। साल 2027 के विधानसभा चुनाव पर फोकस किए हुए सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव वोट बैंक के दायरे में इजाफा करने की रणनीति पर अमल कर रहे हैं ऐसे में क्षत्रिय वोटरों की एकमुश्त नाराजगी मोल लेने का खतरा भी नहीं उठाना चाहेंगे। इसलिए भविष्य की सियासत को आंककर-समीकरणों को परखकर चल रहे हैं। दलित मुद्दे लेकर आक्रामक तेवर भी जता रहे हैं तो क्षत्रिय या राजपूत समाज की भावनाओं को आहत न करने की बात करके डैमेज कंट्रोल भी कर रहे हैं। वैसे सियासी तौर से संवेदनशील इस मुद्दे को लेकर उठा तूफ़ान जल्द थमने के आसार नहीं हैं।