Monday 2nd of February 2026

राखीगढ़ी को लेकर बजट में वित्त मंत्री ने किया बड़ा ऐलान, जानें, राखीगढ़ी के बारे में

Reported by: Bureau Report  |  Edited by: Atul Verma  |  February 02nd 2026 04:32 PM  |  Updated: February 02nd 2026 04:32 PM

राखीगढ़ी को लेकर बजट में वित्त मंत्री ने किया बड़ा ऐलान, जानें, राखीगढ़ी के बारे में

दिल्ली, 2 फरवरी। देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश कर दिया है, जिसमें कई बड़ी घोषणाएं सामने आई, वहीं, हरियाणा के हिसार में स्थित राखीगढ़ी को लेकर भी मोदी सरकार ने इस बजट में अहम घोषणा की, बता दें कि राखीगढ़ी को अब देश के 15 आइकॉनिक पुरातात्विक स्थलों की सूची में शामिल किया जाएगा। वहीं, इस पहल से दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक सिंधु घाटी के इस केंद्र को अब अंतर्राष्ट्रीय टूरिज्म सेक्टर में नई पहचान मिलने की बड़ी उम्मीद है।

बजट भाषण में वित्त मंत्री ने राखीगढ़ी के लिए की बड़ी घोषणा

बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि राखीगढ़ी में टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए यहां पाथ-वे बनाया जाएगा और कई कल्चरल कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। बता दें कि पिछले बजट में सरकार ने राखीगढ़ी को वैश्विक धरोहर केंद्र में बदलने के लिए करीब 500 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे।

राखीगढ़ी के बारे में फैक्ट्सः एकसाथ मिल चुके हैं कई कंकाल !

राखीगढ़ी में 6 हजार साल पुरानी हड़प्पाकालीन सभ्यता की खोज की जा चुकी है। यहां से एक साथ कई कंकाल भी मिल चुके हैं। इसके अलावा महिलाओं के आभूषण से लेकर पुरानी लिपि और पानी का ड्रेनेज सिस्टम भी मिल चुका है। इससे पता चलता है कि हजारों साल पहले भी देश में एक सभ्यता ऐसी थी, जो विकसित नगर में रहती थी।

प्राचीन सरस्वती नदी के सूखने के कारण हुआ नगर का अंत !

राखीगढ़ी को हड़प्पाकालीन सभ्यता की सबसे बड़ी साइट माना जाता है। पुरातत्व विभाग ने अब तक 5 टीलों की जमीन को एक्वायर किया है। ये साइट प्राचीन सरस्वती नदी के किनारे बसी थी। सरस्वती नदी की सहायक नदी दृष्टवती यहां से बहती थी। इतिहासकारों का मानना है कि यहां बसे नगर का अंत भी नदी के सूख जाने के बाद हुआ होगा।

राखीगढ़ी के ऊंचे टीलों ने खींचा ध्यान

राखीगढ़ी में ऊंचे टीले हैं, जिनका आकार मिश्र के पिरामिड जैसा है। ये 9 टीले 550 हेक्टेयर एरिया में फैले हुए हैं। इस वजह से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का ध्यान इन पर गया। इसके बाद ASI ने राखीगढ़ी का सर्वे करना शुरू किया। अब इस जगह पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग दिल्ली की टीम लगातार काम कर रही है।

राखीगढ़ी की 3 बार की खुदाई में कब क्या मिला?

1. करीब 28 साल पहले ASI ने यहां खुदाई का फैसला लिया था। साल 1997-98 में अमरेंद्र नाथ की अगुवाई में राखीगढ़ी में टीला नंबर-6 और 7 की खुदाई की गई। टीला नंबर-7 से तब एक मानव कंकाल मिला था, जिसके बाद पता चला कि यहां मानव जीवन था और ये कंकाल अब दिल्ली स्थित नेशनल म्यूजियम में रखा हुआ है।

2. मानव सभ्यता की खोज के लिए राखीगढ़ी में दूसरी बार डेक्कन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर वसंत सिंधे की अगुवाई में साल 2013–14 में खुदाई की गई। उन्होंने 6-7 नंबर टीले के साथ 1-2 की भी खुदाई की, जिसमें करीब 60 कंकाल मिले थे। डीएनए से अनुमान लगा कि ये सभ्यता करीब साढ़े 5 हजार साल पुरानी है। इसमें सूखी नदी, बर्तन और कुएं भी मिले।

3. इसके बाद साल 2023-24 में खुदाई का काम ASI ने अपने हाथ में लिया और ASI के अपर महानिदेशक डॉ. संजय कुमार मंजुल की अगुवाई में खुदाई हुई तो इस टीले पर 6 हजार साल पुरानी मकान की दीवार, शंख की चूड़ी, कच्ची ईंटें, तांबा, मनके और मोहरें मिलीं, तभी से लगातार यहां टीलों की खुदाई की जा रही है।

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