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UP Lok Sabha Election 2024: मोहनलालगंज संसदीय सीट का इतिहास, बीते दो आम चुनावों में बीजेपी का वर्चस्व रहा कायम

By  Rahul Rana -- May 19th 2024 12:49 PM -- Updated: May 19th 2024 12:50 PM
UP Lok Sabha Election 2024: मोहनलालगंज संसदीय सीट का इतिहास, बीते दो आम चुनावों में बीजेपी का वर्चस्व रहा कायम

UP Lok Sabha Election 2024: मोहनलालगंज संसदीय सीट का इतिहास, बीते दो आम चुनावों में बीजेपी का वर्चस्व रहा कायम (Photo Credit: File)

ब्यूरो: Gyanendra Shukla, Editor, UP:  यूपी का ज्ञान में बात करेंगे मोहनलालगंज संसदीय सीट की। मोहनलालगंज लखनऊ जिले की तहसील है जो शहर से तकरीबन दस किलोमीटर की दूरी पर है। लखनऊ जिले के तहत दो संसदीय सीटें शामिल हैं। एक लखनऊ और दूसरी मोहनलालगंज संसदीय सीट। मोहनलालगंज क्षेत्र लखनऊ शहर और उन्नाव जिले के बीच स्थित है।

पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व के स्थल

यहां के निगोहा में महाभारत कालीन अहिनिवार धाम अति  प्रसिद्ध है मान्यता है कि यहां मंदिर और सरोवर का निर्माण पांडवों ने करवाया था। सई नदी के किनारे स्थित भवरेश्वर महादेव मंदिर की भी बड़ी मान्यता है। इस क्षेत्र में जंगे आजादी से लेकर ऐतिहासिक काल की कई धरोहर हुआ करती थीं लेकिन ज्यादातर जमींदोज हो चुकी हैं। यहां सिसेंडी के राजा काशी प्रसाद ने 1860 में मोहनलालगंज में दो ऐतिहासिक गेट बनाए थे। एक गेट तो बहुत पहले नष्ट हो गया था तो रायबरेली रोड के फोर लेन होने पर दूसरा गेट भी इतिहास के पन्नों में समा गया। इस क्षेत्र में कालेबीर बाबा मंदिर, काशीश्वर महादेव मंदिर और कालेश्वरी मंदिर अति प्रसिद्ध हैं।

विकास के मामले में अभी भी पिछड़ा है ये क्षेत्र

राजधानी से जुड़े  होने के बावजूद ये अत्यंत पिछड़ा इलाका है। यहां की अधिकांश आबादी गांवों में ही निवास करती है। इस क्षेत्र में उद्योग के नाम पर महज एक फैक्ट्री यू पी ए एल है। जो  पूरे देश मे सीमेंट की चादर बना कर भेजती है। साथ ही कुछ छोटे व मझोले उद्योग भी संचालित हैं। हालांकि राजधानी लखनऊ के शहरी क्षेत्र से सटा हुआ इलाका होने की वजह से यहां जमीनों की खरीद फरोख्त, प्लाटिंग और निर्माण का कार्य तेजी पकड़ चुका है।

मोहनलालगंज संसदीय सीट का इतिहास

ये संसदीय सीट साल 1962 के लोकसभा चुनाव से अस्तित्व में आई थी। तब यहां पर हुए चुनाव में कांग्रेस की गंगा देवी सांसद चुनी गईं। उन्होंने 1967 और 1971 में भी जीत हासिल कर जीत की हैट्रिक लगा दी। 1977 में भारतीय लोकदल के रामलाल कुरील को जनता ने चुना। 1980 में कांग्रेस के कैलाशपति जीते। 1984 में कांग्रेस के प्रत्याशी के तौर पर जगन्नाथ प्रसाद ने जीत दर्ज की। 1989 में जनता दल के खाते में ये सीट दर्ज हुई। तब सरजू प्रसाद सरोज सांसद बने।

नब्बे के दशक से बीजेपी फिर सपा की दस्तक

साल 1991 के चुनाव में देश में राम लहर दिखी और बीजेपी ने यहां भी दस्तक दी। बीजेपी के छोटे लाल ने सांसद चुने गए। 1996 में बीजेपी की पूर्णिमा वर्मा विजयी रहीं। पर फिर लगातार चार चुनावों में ये सीट  समाजवादी पार्टी के खाते में दर्ज होती रही। 1998 और 1999 में सपा की रीना चौधरी लगातार 2 बार जीतीं।  2004 में सपा के जयप्रकाश रावत सांसद चुने गए। 2009 में सपा की सुशीला सरोज सांसद बनीं।

बीते दो आम चुनावों में बीजेपी का वर्चस्व रहा कायम

साल 2014 की मोदी लहर में इस सीट से चुनाव लड़े बीजेपी प्रत्याशी कौशल किशोर ने के चुनाव में देश में मोदी लहर दिखी और इसका फायदा बीजेपी को मोहनलालगंज सीट पर भी हुआ. बीजेपी के प्रत्याशी कौशल किशोर ने पहला संसदीय चुनाव जीता। उन्होंने बीएसपी के के आर के चौधरी को 1,45,416 वोटों के मार्जिन से पराजित कर दिया। 2019 के चुनाव में भी कौशल किशोर लगातार दूसरी बार चुने गए। तब उन्होने सपा-बीएसपी गठबंधन से चुनाव लड़ रहे बीएसपी के सीएल वर्मा को परास्त किया। हालांकि इस बार पिछली दफे के मुकाबले जीत का मार्जिन घटकर 90,204 के आंकड़े तक जा पहुंचा। कौशल किशोर को 629,748 वोट मिले जबकि सीएल वर्मा को 539,519 वोट मिले।कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़े  आर के चौधरी को 60,061 वोट ही मिल सके।

आबादी के आंकड़े और जातीय समीकरण

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित मोहनलालगंज संसदीय सीट पर 21,80,958 वोटर हैं। जिनमें से 35 फीसदी अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखते हैं। 15 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। इसके अलावा यादव, कुर्मी, लोध और निषाद सरीखी कई ओबीसी तादाद के वोटर हैं। एक फीसदी से भी कम अनुसूचित जनजाति के वोटर  भी हैं। दलित वोटरों की इस सीट के चुनाव में निर्णायक भूमिका रहती है।

बीते विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने किया क्लीन स्वीप

इस लोकसभा सीट के तहत 5 विधानसभा सीटें हैं--मोहनलालगंज व मलिहाबाद सुरक्षित सीटें, सरोजनीनगर और बख्शी का तालाब जबकि  सीतापुर जिले की सिधौली सुरक्षित विधानसभा सीट भी इसका हिस्सा है। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया था। सिधौली सुरक्षित सीट से मनीष रावत, मलिहाबाद सुरक्षित सीट से जय देवी, बख्शी का का तालाब से योगेश शुक्ला, सरोजनीनगर से राजेश्वर सिंह, मोहनलालगंज सुरक्षित सीट से अमरेश कुमार रावत विधायक हैं।

साल 2024 की चुनावी बिसात पर सियासी योद्धा संघर्षरत

बीजेपी ने केंद्रीय राज्यमंत्री कौशल किशोर को तीसरी बार यहां से चुनावी मैदान में उतारा है, सपा-कांग्रेस गठबंधन से सपा के आर के चौधरी चुनावी मैदान में हैं। बीएसपी की तरफ से राजेश कुमार उर्फ मनोज प्रधान प्रत्याशी हैं। राजेश ने वर्ष 2015 में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा था। मोहनलालगंज के निवासी हैं कारोबारी हैं।

कौशल किशोर और आर के  चौधरी जुझारू सियासतदान रहे हैं

 साल 2013 में बीजेपी में शामिल होने से पहले कौशल किशोर बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ते रहे थे। उनकी राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नाम से एक पार्टी थी। मलिहाबाद से 1989 में विधानसभा चुनाव लड़ा पर महज 1800 वोट पाकर हार गए थे।1991 और 1993 का चुनाव भी हारे। 2002 में मलिहाबाद सुरक्षित सीट से पहली बार निर्दलीय जीतकर विधायक बने। तत्कालीन मुलायम सिंह यादव की सपा सरकार थी. मुलायम सिंह ने उन्हें श्रम राज्यमंत्री बनाया, हालांकि आठ महीने बाद ही मंत्री पद से हट गए। साल  2009 में मलिहाबाद के विधानसभा उपचुनाव और 2012 के चुनाव में भी उतरे पर हार गए। इनकी पत्नी जया कौशल मलिहाबाद से बीजेपी विधायक हैं। मौजूदा वक्त में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं। वहीं, सपा के आर के चौधरी ने कांशीराम के साथ जुड़कर राजनीति की शुरुआत की थी..सामाजिक संगठन बीएस-4 बनाया। बीएसपी की सरकारों में चार बार कैबिनेट मंत्री भी रहे। लेकिन 2019 के आम चुनाव से पहले मायावती से रिश्ते तल्ख हुए तो बीएसपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए। फिर सपा का हिस्सा बन गए।  मोहनलाल गंज लोकसभा सीट से तीन बार चुनाव लड़े पर हार गए। बहरहाल, चुनावी मुकाबला बीजेपी और सपा के दरमियान सिमटा दिख रहा है।

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