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UP Lok Sabha Election 2024: पौराणिक मान्यताओं से आधुनिक युग तक का उन्नाव का जुड़ाव, चुनावी बिसात पर डटे हैं सियासी योद्धा

By  Rahul Rana -- May 11th 2024 02:00 PM
UP Lok Sabha Election 2024: पौराणिक मान्यताओं से आधुनिक युग तक का उन्नाव का जुड़ाव, चुनावी बिसात पर डटे हैं सियासी योद्धा

UP Lok Sabha Election 2024: पौराणिक मान्यताओं से आधुनिक युग तक का उन्नाव का जुड़ाव, चुनावी बिसात पर डटे हैं सियासी योद्धा (Photo Credit: File)

ब्यूरो: Gyanendra Shukla, Editor, UP: यूपी के ज्ञान में चर्चा करेंगे उन्नाव संसदीय सीट की। गंगा और सई नदी के बीच बसा हुआ है ये शहर। इसके उत्तर में राजधानी लखनऊ है तो  दक्षिण में कानपुर शहर। उन्नाव पौराणिक व ऐतिहासिक नजरिए से अति महत्वपूर्ण शहर रहा है।

पौराणिक मान्यताओं से आधुनिक युग तक का उन्नाव का जुड़ाव

पौराणिक मान्यता के अनुसार यहां गंगा के तट पर ही बैठकर महर्षि वाल्मीकि ने विश्व के प्रथम महाकाव्य रामायण की रचना की थी। मान्यता ये भी है कि लवकुश ने इसी स्थल पर भगवान राम की सेना को परास्त किया था। गौतम बुद्ध ने यहां के बांगरमऊ के नेवल जकटापुर गांव में सोलहवां वर्षावास व्यतीत किया था। चीनी यात्री ह्वेन त्सांग ने बांगरमऊ को ना-फो-टु-पो-कु-लो नाम से संबोधित किया। आज से कोई 1200वर्ष पूर्व वनों से घिरे हुए इस क्षेत्र में चौहान राजपूतों ने सवाईगोदो नाम के शहर को बसाया। पर बाद में यहां कन्नौज का कब्जा हो गया। खंडे सिंह यहां के गर्वनर बनाए गए। जिनकी हत्या इनके लेफ्टिनेंट रहे उनवंत सिह बिसेन ने कर दी। उन्वंत सिंह बिसेन ने यहां किला बनवाकर अपने नाम से इस शहर का नाम उन्नाव रख दिया।

वीर क्रांतिकारियों की धरा रही है उन्नाव

आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले यहां के क्रांतिकारियों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। यहां के राजा राव राम बक्श सिंह,मौलाना हसरत मोहानी,राम बेनी माधव,पीडी विशंभर दयाल त्रिपाठी, हादी सिंह,देवी बक्स सिंह,मंसब अली, कस्तूरी सिंह, भोपाल सिंह और चंद्रिका बख्श सिंह सरीखे वीर क्रांतिकारियोंने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया।  1857 की क्रांति के बाद तत्कालीन अवध के बैसवारा चकला को विभाजित करके उसके उत्तरी भाग उन्नाव को नया जिला बनाया गया था।

साहित्यिक व्योम में उन्नाव का अप्रतिम योगदान

साहित्य जगत की नामचीन हस्तियों की उन्नाव जन्मस्थली रही है। जिनमें सूर्यकांत त्रिपाठी निराला,प्रताप नारायण मिश्र, भगवती चरण वर्मा, डॉ रामविलास शर्मा, डा शिवमंगल सिंह सुमन, नंददुलारे वाजपेयी शामिल हैं। तो आल्हा गायक लल्लू बाजपेई सरीखी महान  हस्तियां  भी यहीं से जुड़ी थीं।

विकास के आयाम और पर्यटन स्थल

उन्नाव का नवाबगंज पक्षी विहार पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केन्द्र हैं जहां सर्दियों में साइबेरियाई प्रवासी पक्षियों की दुर्लभ प्रजाति को निहारने बड़ी तादाद में लोग आते हैं। यहां के मोती नगर के शिव मंदिर अति प्रसिद्ध है। इस जिले में चमड़े का काम बहुतायत में होता है। सुपरहाउस ग्रुप, मिर्जा टेनर, रहमान एक्सपोर्ट्स और ज़मज़म टेनर्स, महावीर स्पिन फैब यहां के नामचीन चमड़ा उत्पादक कंपनियां हैं। इसके अलावा मच्छरदानी, जरदोजी और रासायनिक उद्योग भी यहां बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मुहैया कराता है।

चुनावी इतिहास के आईने में उन्नाव

साल 1952 में कांग्रेस प्रत्याशी विश्वम्भर दयाल त्रिपाठी यहां से सांसद चुने गए।  1957 में गंगादेवी को पहली महिला सांसद के तौर पर चुनी गईं। दरअसल, तब जिले से दो सांसद चुने जाते थे, एक उन्नाव लोकसभा क्षेत्र से और दूसरा सांसद रायबरेली पश्चिम और हरदोई दक्षिण पूर्व से। कांग्रेस के टिकट से ही  विशंभर दयाल  त्रिपाठी और गंगादेवी चुनाव जीती थीं। 1960 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस की लीलाधर अस्थाना को जीत हासिल हुई। 1962 और 1967 में कांग्रेस के कृष्ण देव त्रिपाठी यहां से सांसद बने। 1971 में कांग्रेस के जियाउर रहमान अंसारी को चुनाव जीतकर सांसद बनने का मौका मिला। 1977 में जनता पार्टी के राघवेन्द्र सिंह ने कांग्रेस को हरा दिया।1980 व 1984 में कांग्रेस के  जियाउर रहमान अंसारी ने ये सीट फतेह की। 1989 के चुनाव में जनता दल के अनवर अहमद सांसद बने।

नब्बे के दशक से बीजेपी का परचम फहराया

नब्बे के दशक की शुरुआत से ही यहां बीजेपी का खाता खुल गया। एक के बाद एक लगातार तीन चुनावों मे बीजेपी को कामयाबी हासिल हुई। 1991, 1996 और 1998 में बीजेपी के देवी बख्श सिंह ने लगातार जीत की हैट्रिक लगा दी।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला  दीक्षित को यहां जीत न मिल सकी

दिग्गज कांग्रेसी नेता और केंद्रीय गृहमंत्री रहे उमाशंकर दीक्षित की बहू शीला दीक्षित ने भी अपनी ससुराल उन्नाव में भाग्य आजमाया। साल 1996 में वह नारायण दत्त तिवारी द्वारा बनाई गई तिवारी कांग्रेस के टिकट से चुनाव मैदान मे उतरी हालांकि उन्हें महज 11037 वोट ही मिले सके। वे पांचवे पायदान पर रहीं उनकी जमानत भी जब्त हो गई। बाद में साल 1998 से 2013 तक लगातार तीन बार शीला दीक्षित दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं।

सपा-बीएसपी के बाद यहां कांग्रेस को मौका मिला

साल 1999 में यहां समाजवादी पार्टी का खाता इस सीट पर तब खुला जब दीपक कुमार यहां से चुनाव जीते थे। 2004 में यहां से बीएसपी के टिकट से ब्रजेश पाठक को जीत हासिल हुई। साल 2009 के आम चुनाव में उन्नाव की जनता ने कांग्रेस प्रत्याशी अन्नू टंडन का जबरदस्त समर्थन किया। उन्होने 302009 वोटों के मार्जिन से जीत हासिल की।

मोदी लहर में यहां से बीजेपी का परचम फहराया

2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर का असर उन्नाव में भी दिखा। बीजेपी के टिकट से चुनाव मैदान में उतरे साक्षी महाराज ने 3,10,173 वोटों के अंतर से सपा के अरुण शंकर शुक्ला उर्फ अन्ना महाराज को मात दे दी। तब साक्षी महाराज 5,18,834 वोट मिले थे, जबकि अरुण शंकर शुक्ला 2,08,661 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर बीएसपी के ब्रजेश पाठक रहे थे जिन्हें 2,00,176 वोट हासिल हुए। जबकि 1,97,098 वोट पाकर कांग्रेस की प्रत्याशी अन्नू टंडन चौथे पायदान पर पहुंच गईँ।

पिछले आम चुनाव में भी साक्षी महाराज ने जीत दर्ज की

साल 2019 के आम चुनाव में उन्नाव संसदीय सीट पर बीजेपी की ओर से मैदान में उतरे स्वामी साक्षी महाराज और समाजवादी पार्टी की ओर से अरुण शंकर शुक्ला के बीच मुख्य मुकाबला था। सपा-बीएसपी का गठबंधन था लिहाजा मायावती की पार्टी ने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा और सपा को ही समर्थन दिया था। साक्षी महाराज ने 7,03,507 वोट मिले जबकि सपा के अरुण शंकर शुक्ला को 3,02,551 वोट हासिल हुए। बीजेपी ने ये सीट 4,00,956 वोटों को बड़े मार्जिन से जीत ली। कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व सांसद अन्नू टंडन तीसरे स्थान पर रहीं।

आबादी के आंकड़े और जातीय ताना बाना

इस संसदीय सीट पर प्रदेश में सर्वाधिक वोटर हैं। यहां कुल  23, 38,226 वोटर हैं। जिनमें सर्वाधिक 4.25 लाख लोधी वोटर हैं। साक्षी महाराज की लगातार जीत के दो सिलसिलों के पीछे लोधी वोट बैंक ने निर्णायक किरदार निभाया है। यहां सवा तीन लाख मुस्लिम तो 2.65 लाख ब्राह्मण हैं। 2.25 लाख निषाद व कश्यप बिरादरी के वोटर हैं। 2.5 लाख पासी, 2.20 लाख क्षत्रिय हैं। 1.5 लाख जाटव, 1.25 लाख यादव हैं। एक लाख के करीब वाल्मिकी हैं, 75 हजार वैश्य, 50 हजार पाल, 45 हजार काछी और इतने ही कायस्थ हैं। जबकि 35 हजार कुर्मी वोटर हैं।

पिछले विधानसभा चुनाव मे सभी सीटों पर बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया

2008 में परिसीमन के बाद उन्नाव संसदीय सीट में छह विधानसभाएं शामिल हो चुकी हैं। इनमें भगवंतनगर, पुरवा, सफीपुर, मोहान,बांगरमऊ और उन्नाव सदर शामिल हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में ये सभी सीटें बीजेपी के खाते में दर्ज हुईं। बांगरमऊ से श्रीकांत कटियार, सफीपुर सुरक्षित सीट से बंबा लाल दिवाकर, मोहान सुरक्षित से बृजेश रावत, उन्नाव सदर से पंकज गुप्ता, भगवंतनगर से आशुतोष शुक्ला और पुरवा से अनिल कुमार सिंह विधायक हैं।

चुनावी बिसात पर डटे हैं सियासी योद्धा

मौजूदा चुनावी जंग के लिए बीजेपी ने तीसरी बार फिर साक्षी महाराज पर ही दांव आजमाया है। वह जीत की हैट्रिक लगाने की कोशिश में हैं तो उनसे मुकाबले के लिए सपा कांग्रेस गठबंधन की तरफ से सपा प्रत्याशी अन्नू टंडन मौजूद हैं, जो यहां से चौथी बार चुनाव लड़ रही हैं। जबकि बीएसपी ने अशोक पांडे को टिकट देकर ब्राह्मण कार्ड चला है। पूर्व पत्रकार अशोक पाण्डेय कई नामी गिरामी मीडिया संस्थानों में संपादक के पद पर रहे हैं। कुल आठ प्रत्याशी हैं लेकिन मुकाबला त्रिकोणीय बना हुआ है। 

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