लखनऊ, 21 फरवरी। राज्य परिवर्तन आयोग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लखनऊ में राज्य स्तरीय कार्यशाला “Revitalizing the Lifeline: Clean Gomti 2026” का आयोजन किया गया। माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व एवं राज्य परिवर्तन आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री मनोज कुमार सिंह के निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला ने गोमती नदी के पुनरुद्धार की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल की ठोस नींव रखी।
गोमती को प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ और जीवनदायिनी बनाना है कार्यशाला का उद्देश्य
इस व्यापक और बहुआयामी कार्यशाला का उद्देश्य गंगा की प्रमुख सहायक नदी गोमती को प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ, सतत और जीवनदायिनी स्वरूप में पुनर्स्थापित करने हेतु एक समग्र, वैज्ञानिक, व्यावहारिक और दीर्घकालिक रणनीति तैयार करना रहा, ताकि नीति निर्माण से लेकर जमीनी क्रियान्वयन तक एक सुदृढ़, समन्वित और प्रभावी कार्ययोजना विकसित की जा सके।
कार्यशाला में कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ रहे मौजूद
कार्यशाला में नीति निर्माण, वित्तीय रणनीति, तकनीकी समाधान, संस्थागत ढांचा, संचालन प्रणाली और नागरिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन मंथन हुआ। इसमें राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि, शिक्षाविद, पर्यावरणविद, सामाजिक संगठन और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की।
गोमती नदी के पुनरुद्धार की आवश्यकता और वर्तमान चुनौतियों की दिशा चर्चा
उद्घाटन सत्र में मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री मनोज कुमार सिंह ने स्वागत संबोधन एवं विषय प्रवर्तन प्रस्तुत करते हुए गोमती नदी के पुनरुद्धार की आवश्यकता, वर्तमान चुनौतियों और दीर्घकालिक समाधान की दिशा पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात राज्यसभा सांसद एवं प्रख्यात पर्यावरणविद् संत बलबीर सिंह सीचेवाल, ‘वाटरमैन ऑफ इंडिया’ के रूप में विख्यात तरुण भारत संघ के संस्थापक श्री राजेन्द्र सिंह तथा भारतीय सेना के सेंट्रल कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा ने नदी संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने पर बल दिया।
गोमती नदी की वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक और तकनीकी विश्लेषण किया प्रस्तुत
कार्यशाला के प्रारंभिक सत्र में गोमती नदी की वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक और तकनीकी विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। इसमें जल प्रवाह की कमी, गाद जमाव, नदी तल की बिगड़ती संरचना, तटों पर अतिक्रमण, घरेलू सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के अनियंत्रित प्रवाह जैसे प्रमुख कारणों की विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि लखनऊ महानगर क्षेत्र में गोमती प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वर्षा जल नालियों में लगातार मिश्रित होता सीवेज है, जो बिना उपचार के सीधे नदी में प्रवाहित हो रहा है। इसके चलते जल गुणवत्ता में गंभीर गिरावट आई है, जिससे जलीय जीवन, मानव स्वास्थ्य और नदी की स्वच्छता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
गोमती नदी उत्तर प्रदेश की जीवनरेखा है- मनोज कुमार
इस मौके पर राज्य परिवर्तन आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री मनोज कुमार सिंह ने कहा कि, “गोमती नदी उत्तर प्रदेश की जीवनरेखा है और इसके संरक्षण व पुनरुद्धार के लिए एक समग्र, वैज्ञानिक तथा दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना अत्यंत आवश्यक है। ‘Revitalizing the Lifeline: Clean Gomti 2026’ कार्यशाला का आयोजन इसी उद्देश्य से किया गया है, ताकि नीति-निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, तकनीकी नवाचार और जनसहभागिता को एक साझा मंच पर लाकर ठोस एवं व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार की जा सके। उन्होंने कहा कि गोमती के प्रदूषण की समस्या केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह जनस्वास्थ्य, आजीविका, जैव विविधता और भावी पीढ़ियों के भविष्य से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।