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UP: प्रदेश की 5 मस्जिदें जहां हिंदू पक्ष ने मंदिर होने का दावा किया, जानें...

Reported by: PTC News उत्तर प्रदेश Desk  |  Edited by: Md Saif  |  December 10th 2024 07:00 PM  |  Updated: December 10th 2024 07:00 PM

UP: प्रदेश की 5 मस्जिदें जहां हिंदू पक्ष ने मंदिर होने का दावा किया, जानें...

ब्यूरो: UP: प्रदेश की पांच प्रमुख मस्जिदों को लेकर हिंदू पक्ष ने दावा किया है कि ये मंदिर तोड़कर बनाई गई थीं। एक बार संक्षिप्त में जानिए इन विवादों के बारे में। 

   

ज्ञानवापी मस्जिद, वाराणसी  

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद काशी विश्वनाथ मंदिर के पास स्थित है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह स्थान काशी विश्वनाथ मंदिर का हिस्सा था, जिसे मुगल शासक औरंगजेब के आदेश पर तोड़कर मस्जिद में तब्दील कर दिया गया। ज्ञानवापी का मामला फिलहाल कोर्ट में लंबित है। इस मस्जिद में सर्वेक्षण हो चुका है।

   

शाही ईदगाह, मथुरा  

यह मस्जिद भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि से सटी हुई है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर बनी थी। उनका कहना है कि मुगलों ने यहां मंदिर तोड़कर मस्जिद का निर्माण करवाया था। हिंदू पक्ष ने इस जगह को वापस लेने के लिए कोर्ट में याचिका दायर की है। वे चाहते हैं कि यहां पूजा-अर्चना की अनुमति दी जाए।

   

संभल जामा मस्जिद  

हाल ही में विवाद में आई संभल की जामा मस्जिद को लेकर हिंसा भड़की थी। हिंदू पक्ष का दावा है कि संभल शहर के बीच में भगवान कल्कि को समर्पित एक सदियों पुराना श्री हरि हर मंदिर है, जिसका नाम जामा मस्जिद समिति की तरफ से जबरन इस्तेमाल किया जा रहा है। इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर तनाव बना हुआ है।

   

जौनपुर की अटाला मस्जिद  

जौनपुर की ऐतिहासिक अटाला मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि अटाला मस्जिद मूल रूप से एक प्राचीन हिंदू मंदिर अटाला देवी मंदिर था। जौनपुर की एक कोर्ट में याचिका दायर कर घोषणा करने की मांग की गई थी कि विवादित संपत्ति अटाला मंदिर है और सनातन धर्म की वहां पूजा करने का अधिकार है। यह विवाद इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित है।

   

बदायूं की जामा मस्जिद  

बदायूं की जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि यहां पहले नीलकंठ महादेव मंदिर था। यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा है। यह पूरा मामला साल 2022 में सामने आया था। अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल ने दावा किया था कि जामा मस्जिद की जगह पहले नीलकंठ महादेव मंदिर था। इसके बाद उन्होंने यहां पूजा-अर्चना की अनुमति के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी।

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