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UP Lok Sabha Election 2024: चुनावी इतिहास के आईने में अंबेडकरनगर संसदीय सीट, नए नाम के साथ ही बदले यहां के चुनावी समीकरण

By  Rahul Rana -- May 23rd 2024 12:50 PM
UP Lok Sabha Election 2024: चुनावी इतिहास के आईने में अंबेडकरनगर संसदीय सीट, नए नाम के साथ ही बदले यहां के चुनावी समीकरण

UP Lok Sabha Election 2024: चुनावी इतिहास के आईने में अंबेडकरनगर संसदीय सीट, नए नाम के साथ ही बदले यहां के चुनावी समीकरण (Photo Credit: File)

ब्यूरो: Gyanendra Shukla, Editor, UP: यूपी का ज्ञान में आज चर्चा करेंगे अंबेडकर नगर संसदीय सीट की। तमसा नदी अंबेडकरनगर को दो भागों अकबरपुर और शहजादपुर में बांटती है। अकबरपुर इस जिले का मुख्यालय है। एक जिले के तौर  पर अंबेडकर नगर का अस्तित्व सामने आया 29 सितंबर, 1995 को। जब तत्कालीन फैजाबाद से इसे अलग करके नया जिला बनाया गया। ये जिला पांच तहसील और दस ब्लाकों में बंटा हुआ है। सरयू नदी यहां की मुख्य नदी है जो जिले की उत्तरी सीमा पर स्थित है। यह उत्तर में बस्ती और संत कबीर नगर से, उत्तर-पूर्व में गोरखपुर से, दक्षिण में सुल्तानपुर से, पश्चिम में अयोध्या (फैजाबाद) से और पूर्व में आजमगढ़ जिले से घिरा हुआ है।

इस संसदीय क्षेत्र से जुड़ी मान्यताएं व इतिहास

अयोध्या से सटा हुआ क्षेत्र होने के कारण इसकी प्राचीन काल से ही अति महत्ता रही है। रामायण के अनुसार मातृ-पितृ भक्त श्रवण कुमार जब तमसा और बिसुई नदी के संगम स्थल पर पहुंचे थे तब अयोध्या के राजा दशरथ ने उन्हें गलती से तीर मार दिया था। यहां श्रवण धाम है जहां श्रद्धालु बड़ी तादाद में पहुंचते हैं। यहां के  प्राचीन मंदिरों को यवनों के आक्रमण में ध्वस्त कर दिया गया था। आज के जलालपुर कस्बे के आसपास के क्षेत्र में 1300 ईस्वी के आसपास तक राजभरों का शासन हुआ करता था। भुजगी और सुरहुरपुर दो रियासतें थी। बाद में सुरहुरपुर को सैय्यद सालार मसूद गाजी ने जीत लिया था जबकि भुजगी रियासत राजपूतों के कब्जे में आ गई।

मुगल बादशाह अकबर का यहां आगमन हुआ

1566 ईस्वी में मुगल बादशाह अकबर यहां आए थे। अकबर ने यहां के तहसील तिराहे के पास वाले क्षेत्र में किले वाली मस्जिद का निर्माण करवाया। एक बस्ती भी बसाई जिसे अकबरपुर नाम दिया गया। जो अब इस जिले का मुख्यालय है। चूंकि तब तमसा नदी को पार करने का कोई साधन नहीं था। लिहाजा अकबर ने यहां लकड़ी का एक शाही पुल बनाया। यही पुल आज बदले स्वरूप में अकबरपुर और शहजादपुर को जोड़ता हैं।

क्षेत्र के प्रमुख आस्था केन्द्र व हस्तियां

यहां के कई प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं। जिनमें धवरुआ तिराहे का राम जानकी मंदिर, गोसाईगंज मार्ग पर स्थित प्राचीन "शिव बाबा धाम" है....आलापुर तहसील के अहिरौली में संत गोविंद साहेब की समाधि अति प्रसिद्ध है। किछौछा शरीफ दरगाह में बड़ी तादाद में श्रद्धालु मन्नत की आस लेकर पहुंचते हैं। ये जिला समाजवाद के पुरोधा राम मनोहर लोहिया की ये जन्मस्थली भी है।

उद्योग धंधे और विकास का आयाम

साल 2006 में केन्द्रीय पंचायती राज विभाग ने देश के जिन ढाई सौ अति पिछड़े जिलों की लिस्ट तैयार की थी उनमें यूपी के 34 जिलों में से अंबेडकरनगर भी शामिल है। यहां टांडा कस्बे मे एनटीपीसी का थर्मल पॉवर प्लांट है। जेपी ग्रुप का सीमेंट निर्माण संयंत्र है। अकबरपुर के मिझौरा चीनी मिल भी है। चेत्रिया गांधी आश्रम है। यहां का टांडा टेराकोटा के लिए प्रसिद्ध है। हैंडलूम व पावरलूम के जरिए कपड़ों के निर्माण का कार्य टांडा क्षेत्र में बहुतायत में होता है। टांडा-अकबरपुर-जलालपुर में  43000 से अधिक कारीगर इसी काम से जुड़े हुए हैं। यहां कमीज के कपड़े, अस्तर के कपड़े,लुंगी, गमछा व रूमाल उत्पादित किए जाते हैं।

चुनावी इतिहास के आईने में अंबेडकरनगर संसदीय सीट

पूर्व में ये क्षेत्र अकबरपुर लोकसभा के नाम से जाना जाता था पर  परिसीमन के बाद 2009 से इसे अंबेडकर नगर सीट कहा जाने लगा। वर्ष 1962 में फैजाबाद (अयोध्या) से पांच विधानसभा सीट अकबरपुर, कटेहरी, टांडा, जलालपुर व आलापुर को शामिल कर अकबरपुर सुरक्षित (वर्तमान में अंबेडकरनगर लोकसभा) सीट का गठन किया गया था। 1962 में हुए यहां के पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से पन्ना लाल सांसद चुने गए थे। 1967 में रिपब्लिकन पार्टी आफ इंडिया से रामजी राम जीते। रामजीराम 1971 में भी सांसद चुने गए पर इस बार वे कांग्रेस से चुनाव लड़े थे। 1977 में जनता पार्टी के मंगल देव विशारद जीते। तो 1980 में जनता पार्टी-सेक्युलर के रामअवध को जीत हासिल हुई। 1984 में कांग्रेस के रामप्यारे सुमन ने पार्टी को फिर इस सीट पर काबिज करवाया। पर फिर ये सीट कांग्रेस के हाथों से फिसल गई। 1989 व 1991 में यहां से जनता दल से रामअवध चुनाव जीते।

नए जिले के ऐलान के साथ ही ये क्षेत्र बीएसपी का गढ़ बना

29 सितंबर, 1995 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने शिवबाबा धाम पर आयोजित जनसभा के दौरान डॉ. भीमराव आंबेडकर की स्मृति में नए जिले का गठन करने का ऐलान किया। जिसका जनता ने जबरदस्त उत्साह के साथ स्वागत किया। यहां बीएसपी के पक्ष में माहौल बन गया और 1996 में हुए लोकसभा चुनाव में बसपा के घनश्याम चंद्र खरवार भारी बहुमत से चुनाव जीते। 1998 में यहां मायावती खुद चुनाव लड़ीं और जीतीं। 1999 में मायावती ने अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद को हराया। लेकिन प्रदेश राजनीति में सक्रिय होने के लिए वर्ष 2002 में मायावती ने सांसद पद छोड़ दिया। यहां हुए उपचुनाव में फिर बीएसपी को जीत मिली। तब त्रिभुवन दत्त सांसद चुने गए। वर्ष 2004 के आम चुनाव में मायावती तीसरी बार यहां से चुनाव  जीतीं। लेकिन फिर उन्होंने ये सीट छोड़ दी। इसके बाद हुए वर्ष 2004 के उपचुनाव में शंखलाल मांझी ने जीत हासिल करके इस सीट पर समाजवादी पार्टी का खाता खोल दिया।

नए नाम के साथ ही बदले यहां के चुनावी समीकरण

साल 2009 में इस सीट का नाम अंबेडकर नगर हो गया। यहां से फिर बीएसपी को कामयाबी मिली। पार्टी के राकेश पांडेय चुनाव जीते। सपा के शंखलाल माझी दूसरे पायदान पर और बीजेपी के फायर ब्रांड विनय कटियार तीसरे स्थान पर जा पहुंचे। साल 2014 की मोदी लहर का असर इस सीट पर भी दिखा। यहां बीजेपी के हरिओम पाण्डेय ने बीएसपी के राकेश पांडेय को 1,39,429 वोटों के मार्जिन से हरा दिया। सपा के राम मूर्ति वर्मा तीसरे स्थान पर रहे थे। 2019 के चुनाव में राकेश पांडेय के छोटे बेटे रितेश पांडेय बीएसपी प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़े और बीजेपी के मुकुट बिहारी को 95,880 वोटों से मात देकर ये सीट बीएसपी के नाम कर दी। हालांकि अब रितेश पांडेय बीजेपी मे शामिल हो चुके हैं।

वोटरों की तादाद और जातीय समीकरण

इस सीट पर 19,00,393 वोटर हैं। जिनमें से सर्वाधिक चार लाख अनुसूचित जाति से हैं। 3.70 लाख मुस्लिम हैं। 1.78 लाख कुर्मी, 1.70 लाख यादव हैं। जबकि 1.40 लाख ब्राह्मण, 1 लाख क्षत्रिय वोटर हैं इतने ही वैश्य वोटर हैं। इसके साथ ही इस सीट पर निषाद और राजभर वोटरों की  भी प्रभावी तादाद है।

बीते विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी का क्लीन स्वीप

अंबेडकर नगर संसदीय सीट के तहत 5 विधानसभा सीटें आती है, जिसमें कटेहरी, टांडा, अलापुर, जलालपुर और अकबरपुर सीटें अंबेडकरनगर की हैं जबकि अयोध्या की गोसाईगंज सीट भी शामिल है। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां सपा ने क्लीन स्वीप किया था। बीजेपी का खाता तक नहीं खुल सका। अकबरपुर सीट से सपा के राम अचल राजभर, जलालपुर सीट से राकेश पांडेय जीते,  अयोध्या की गोसाईगंज सीट से सपा के टिकट से अभय सिंह कटेहरी से सपा के  लालजी वर्मा, टांडा से सपा के राममूर्ति वर्मा विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव में इनमें से राकेश पाण्डेय और अभय सिंह ने बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की है।

साल 2024 की चुनावी बिसात पर डटे योद्धा

सपा सांसद रहे राकेश पांडेय के बेटे और निर्वतमान बीएसपी सांसद रितेश पाण्डेय बीजेपी की तरफ से चुनावी मैदान में हैं। सपा से लालजी वर्मा और बीएसपी से कमर हयात अंसारी मौजूद हैं। बीएसपी ने पहले किछौछा के कलाम शाह को टिकट दिया था। इन प्रत्याशियों में रीतेश पांडेय बीएसपी छोड़कर बीजेपी में आए हैं। जबकि विधानसभा चुनाव से पहले लालजी वर्मा बीएसपी से नाता तोड़कर सपा में शामिल हो गए थे, वर्मा मायावती की सरकार में संसदीय कार्यमंत्री हुआ करते थे। अब सपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं। कमर हयात अंसारी बीएसपी के पुराने कार्यकर्ता हैं। जलालपुर नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन भी रह चुके हैं। इनकी पत्नी फरजाना खातून भी नगरपालिका अध्यक्ष रह चुकी हैं। बहरहाल, जातीय गुणा गणित के पेचों में फंसी अंबेडकरनगर संसदीय सीट पर  चुनावी मुकाबला बेहद रोचक और कड़ा हो गया है।

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