Sun, Apr 14, 2024

बेमौसम बारिश से फसल हुई तबाह, सरकारी मुआवज़े पर लग रहे सवालिया निशान !

By  Mohd. Zuber Khan -- March 23rd 2023 10:09 AM -- Updated: March 23rd 2023 11:16 AM
बेमौसम बारिश से फसल हुई तबाह, सरकारी मुआवज़े पर लग रहे सवालिया निशान !

बेमौसम बारिश से फसल हुई तबाह, सरकारी मुआवज़े पर लग रहे सवालिया निशान ! (Photo Credit: File)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दिनों की बारिश व ओलावृष्टि से करीब 19 हज़ार किसानों की 10 हज़ार हेक्टेयर से अधिक की फसलें बर्बाद हुई हैं। इनका नुकसान 33 फीसदी से ज़्यादा आंका गया है। ऐसे में मुआवज़ा देने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सरकार ने इसके लिए 13 करोड़ से ज़्यादा की राशि मंज़ूर की है। पर ऐसे किसानों में मायूसी है, जिनकी फसल 33 फीसदी से कम बर्बाद हुई है। वे मुआवज़े के फॉमूले पर सवाल उठा रहे हैं।

प्रतापगढ़ में आसमान से बरस रही है तबाही

आंधी, मूसलाधार बारिश और पत्थर गिरने से किसानों की हाड तोड़ मेहनत और गाढ़ी कमाई हो रही है तबाह, प्रकृति का क़हर किसानों पर लगातार टूट रहा है, जिसके चलते किसानों की खड़ी फसल गेंहू, चना, सरसों के साथ ही आम के बौर व महुआ के कूंच ज़मीन पर गिर गए, जिसके चलते किसानों की बहन-बेटियों की शादी और बच्चों की पढ़ाई के अरमान मिट्टी में मिल गए।

बर्फ़ के बड़े बड़े टुकड़े आसमान से बरस रहे हैं, इस बेमौसम आसमान से आई किसानों के लिए आफत ने इस मैदानी जिले को कुल्लू, मनाली और कश्मीर की वादियों जैसा बना दिया है और देखते ही देखते बर्फ की मोटी परत फैल गई है, बिजली सप्लाई तो बन्द हो गई है, तमाम पेड़ धराशाई और बेजान हो गए हैं, जिसके चलते यातायात भी बाधित हो गया है। 

किसानों के यहां मांगलिक कार्यक्रम तो फसल चक्र पर आधारित होते हैं। फसलों के कटने के बाद ही लगन शुरू होती है, जिसमे किसान शादी ब्याह के आयोजन तो होते ही हैं, ही साथ बच्चों की फीस और बीमारियों से निपटने के लिए भी अनाज बेचकर नकदी का इंतजाम किए जाने की परंपरा है।

लेकिन अफ़सोस, सुबह किसान जब अपने खेतों की तरफ पहुचे, तो अपनी फसल देख कर उनकी आंखें नम हो गई, किसानों ने बताया कि गेंहू, चना, मटर और आम के बौर नष्ट हो गए हैं, तो सरसों के दाने पूरी तरह से खेत मे ही गिर गए हैं, सब कुछ बर्बाद हो गया।

आपको बता दें कि यहां पर ज़्यादातर किसान क़र्ज लेकर खेती करते है, फसल बर्बाद होने से उनके ऊपर क़र्ज़ अलग चढ़ जाएगा, जिसका ब्याज भी उन्हें ही चुकता करना होगा और ऊपर से महंगाई की मार अलग से झेलनी होगी, यानी क़ुदरत के इस क़हर से किसानों को निजात कैसे मिलेगी , फिलहाल इसका जवाब किसी के पास नहीं है, लेकिन हां, सरकार और प्रशासन की तरफ़ लोगों की नज़रें टिकी हुई हैं।

हालांकि सरकार ने मुआवज़े की बात कही है, लेकिन किसानों की मुसीबत को किस क़दर कम कर पाने में ये मुआवज़े सही साबित होगा, ये भविष्य के गर्भ में छिपा हुआ है।

ये हैं मुआवज़े के मानक !

एक अधिकारी ने बताया कि अधिकाधिक किसानों के फायदे के लिए ज़िला, तहसील, ब्लाॅक या गांव को क्षति आकलन का मानक बनाने की जगह व्यक्ति को इकाई के रूप में लिया गया है।

- यदि एक भी व्यक्ति को आपदा से नुकसान हुआ है तो उसे तय मुआवज़ा मिलेगा, पर उसका नुकसान 33%से ज्यादा होना चाहिए

- सरकार आपदा की जिले से प्रारंभिक रिपोर्ट लेकर मुआवज़े की अनुमानित राशि जारी कर देती है

-PTC NEWS

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