Tuesday 13th of January 2026

तकनीक जब संवेदना से जुड़ती है, तभी विकास समावेशी बनता है – सीएम योगी आदित्यनाथ

Reported by: Gyanendra Kumar Shukla, Editor, PTC News UP  |  Edited by: Dishant Kumar  |  January 13th 2026 01:52 PM  |  Updated: January 13th 2026 01:52 PM

तकनीक जब संवेदना से जुड़ती है, तभी विकास समावेशी बनता है – सीएम योगी आदित्यनाथ

लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आज शासन को रिएक्टिव से प्रोएक्टिव बनाने का सशक्त माध्यम बन रही है। लखनऊ में ‘एआई इन ट्रांसफॉर्मिंग हेल्थकेयर’ विषय पर दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन अवसर पर उन्होंने कहा कि तकनीक जब संवेदना से जुड़ती है, नीति जब नवाचार से संचालित होती है और शासन जब विश्वास पर आधारित होता है, तभी विकास समावेशी बनता है और भविष्य सुरक्षित होता है। उन्होंने बताया कि यूपी एआई मिशन के तहत प्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के प्रयोग में देश में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के प्रयोग से स्वास्थ्य नीतियों को अधिक सटीक और प्रभावी बनाया जा सकता है। एआई के उपयोग से महामारियों, वेक्टर जनित रोगों के संबंध में डेटा कलेक्शन और उसके फीडबैक से बेहतर निर्णय, बेहतर नीति और बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सकते हैं। हमारी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी उन्नयन और नई तकनीक के प्रयोग को प्रोत्साहित करती रही है। इस क्रम में प्रदेश में मेडिकल डिवाइस पार्क, फार्मा पार्क, लखनऊ में मेडिटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, गौतम बुद्ध नगर में एआई एंड इनोवेशन आधारित उद्यमिता केंद्र, आईआईटी कानपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा लखनऊ को एआई सिटी के रूप में विकसित करने का कार्य प्रगति पर है। इसी क्रम में यूपी एआई मिशन के तहत लगभग 2000 करोड़ रुपये के कार्यक्रम अगले तीन वर्षों में चरणबद्ध रूप से लागू किए जाएंगे, जो उत्तर प्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के प्रयोग में देश में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ग्यारह वर्षों में प्रधानमंत्री जी के कुशल नेतृत्व में हमने देश में तकनीक के प्रभाव को जमीनी धरातल पर मूर्त रूप लेते देखा है। उत्तर प्रदेश में भी पिछले आठ वर्षों से हमारी डबल इंजन की सरकार ने आधुनिक तकनीक के माध्यम से शासन के विजन, नीतियों और वेलफेयर योजनाओं को अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने में सफलता हासिल की है। हमने प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में 80,000 दुकानों पर ई-पॉस मशीनें लगवाईं। एकसाथ छापेमारी कर वर्ष 2017 से पहले गरीब लोगों के नाम से बनाए गए 30 लाख फर्जी राशन कार्ड बरामद किए और पात्र व्यक्तियों तक योजना का लाभ पहुंचाया। आज सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली में आम जन की शिकायतें शून्य स्तर पर पहुंच चुकी हैं। उन्होंने कहा कि आज हमारी सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) और डिजिटल ट्रांजेक्शन के माध्यम से प्रदेश में 1 करोड़ 6 लाख परिवारों को वृद्धावस्था, निराश्रित महिला और दिव्यांगजन पेंशन का लाभ सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचा रही है, जिससे योजनाओं का सौ प्रतिशत लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंच रहा है। ये सब तकनीक का सही दिशा और विजन के साथ प्रयोग कर संभव हुआ है।

प्रदेश की स्वास्थ्य संरचना में हुए परिवर्तन को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल 40 मेडिकल कॉलेज थे, जो आज बढ़कर 81 हो चुके हैं, जबकि दो एम्स भी संचालित हैं। उन्होंने बताया कि कोविड-19 से पहले कई जिलों में आईसीयू की सुविधाएं नहीं थीं। प्रदेश में ऑक्सीजन प्लांट, डायलिसिस, ब्लड बैंक और डिजिटल डायग्नोस्टिक सुविधाओं का अभाव था। लेकिन आज ये सभी सुविधाएं प्रत्येक जनपद में मौजूद हैं। यही नहीं कोविड काल में शुरू किए गए वर्चुअल आईसीयू और टेली मेडिसिन सेवाओं का लाभ प्रदेश के दूर-दराज के क्षेत्रों के लोगों को भी मिल रहा है।

प्रदेश में इंसेफेलाइटिस उन्मूलन को तकनीक, निगरानी और लक्षित प्रशासन की सफलता का उदाहरण बताते हुए कहा मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस बीमारी से हर वर्ष 12-15 सौ बच्चों की मृत्यु होती थी, आज उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस से होने वाली मृत्यु शून्य है। इसी प्रकार मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर और संस्थागत प्रसव के क्षेत्र में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय सुधार किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि टीबी उन्मूलन की दिशा में एआई आधारित टूल्स के माध्यम से रोगियों और जोखिम क्षेत्रों की पहचान, उपचार और निगरानी को प्रभावी बनाया गया है। हमारी सरकार एआई का उपयोग केवल स्वास्थ्य सेवाओं में ही नहीं, आधुनिक पुलिसिंग, कृषि, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में भी कर रही है। अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि एआई मानव द्वारा संचालित होना चाहिए, मानव एआई द्वारा संचालित न हो। हमें आने वाले दिनों में इस संतुलन को बनाए रखना भी आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन व्यावहारिक समाधानों, पायलट परियोजनाओं और समयबद्ध कार्ययोजना की दिशा में सार्थक परिणाम देगा और स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, उत्तर प्रदेश सरकार में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री सुनील शर्मा, राज्यमंत्री अजीत पाल, नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. पॉल एवं अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा अमित कुमार घोष सहित अनेक विषय विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।

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