Friday 9th of January 2026

अप्रेंटिसशिप योजना से 2025-26 में अब तक 83 हजार से अधिक युवाओं को मिला उद्योगों में प्रशिक्षण का अवसर

Reported by: Gyanendra Kumar Shukla, Editor, PTC News UP  |  Edited by: Dishant Kumar  |  January 08th 2026 07:35 PM  |  Updated: January 08th 2026 07:35 PM

अप्रेंटिसशिप योजना से 2025-26 में अब तक 83 हजार से अधिक युवाओं को मिला उद्योगों में प्रशिक्षण का अवसर

लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में युवाओं के कौशल विकास और रोजगारपरक प्रशिक्षण को नई रफ्तार देने के लिए अप्रेंटिसशिप के क्षेत्र में मजबूत पहल की जा रही है। राज्य में संचालित अप्रेंटिसशिप योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को उद्योगों व एमएसएमई इकाइयों से जोड़ा जा रहा है, ताकि उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ रोजगार के अवसर भी मिल सकें। वर्ष 2025-26 में अप्रेंटिसशिप योजना के तहत 83,277 युवाओं को उद्योगों और एमएसएमई इकाइयों में शिक्षुता प्रशिक्षण हेतु योजित किया गया है। इससे युवाओं को उत्पादन इकाइयों, सेवा क्षेत्र और लघु–मध्यम उद्योगों में काम सीखने का प्रत्यक्ष अवसर मिला है। सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक युवा “सीखते हुए कमाएं” और उद्योगों के अनुरूप कौशल प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनें।

सिर्फ प्रमाण पत्र नहीं, व्यावहारिक अनुभव भी मिल रहा

प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता  राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिलदेव अग्रवाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश को कुशल मानव संसाधन का हब बनाने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। अप्रेंटिसशिप योजना के माध्यम से युवाओं को सिर्फ प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि काम का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है। हमारे लिए लक्ष्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रशिक्षित युवाओं को उद्योगों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। नेशनल और मुख्यमंत्री अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजनाओं के तहत दी जा रही प्रतिपूर्ति से अधिष्ठानों की रुचि बढ़ी है और इससे रोजगारपरक अवसरों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। राज्य सरकार हर युवा को उसकी क्षमता के अनुरूप कौशल और अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

उपलब्ध कराई जा रही प्रतिपूर्ति की सुविधा

उत्तर प्रदेश में नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना तथा मुख्यमंत्री अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत संबंधित अधिष्ठानों और अभ्यर्थियों को प्रतिपूर्ति की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे शिक्षुओं को प्रशिक्षण अवधि के दौरान आर्थिक सहयोग मिलता है, वहीं अधिष्ठानों को भी प्रशिक्षुओं को रखने के लिए प्रोत्साहन प्राप्त होता है। योगी सरकार का मानना है कि यह मॉडल युवाओं और उद्योग दोनों के लिए लाभकारी है।

नियुक्ति की संभावनाएं कई गुना बढ़ीं

अप्रेंटिसशिप के दायरे को बढ़ाने के लिए सशक्त संस्थागत ढांचा तैयार किया गया है। इसी के परिणामस्वरूप पिछले चार वर्षों में 795 नवीन अधिष्ठानों को पोर्टल पर पंजीकृत कराया गया है। नए पंजीकरण से विभिन्न जिलों में प्रशिक्षण के अवसरों का दायरा बढ़ा है और स्थानीय स्तर पर युवाओं को उद्योगों तक पहुंच आसान हुई है। इसके साथ ही सीएमएपीएस योजनान्तर्गत 6,164 नए अभ्यर्थियों को लाभान्वित किया गया है। विभाग के अनुसार, इन योजनाओं के जरिए युवाओं को केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि रोजगारपरक कौशल और औद्योगिक अनुभव भी मिल रहा है, जिससे नियुक्ति की संभावनाएं बढ़ रही हैं।

विभागीय स्तर पर प्रक्रियाओं को बनाया गया सरल

राज्य में कौशल विकास की इस सतत प्रक्रिया का बड़ा परिणाम यह रहा कि बीते लगभग नौ वर्षों में 4 लाख से अधिक प्रशिक्षु युवाओं को विभिन्न औद्योगिक संस्थानों में सेवायोजित कराया गया है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश को कुशल मानव संसाधन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम मानी जा रही है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि अप्रेंटिसशिप को बड़े पैमाने पर बढ़ाते हुए युवाओं को उद्योगों, स्टार्टअप्स और MSME सेक्टर से जोड़ा जाए। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है, ऑनलाइन पोर्टल को सुदृढ़ किया गया है और उद्योगों के साथ समन्वय भी बढ़ाया गया है। सरकार का मानना है कि कौशलयुक्त युवा न केवल अपने लिए अवसर पैदा करेंगे, बल्कि प्रदेश के औद्योगिक विकास और निवेश माहौल को भी मजबूती देंगे।

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